Saturday, December 19, 2009

इतना असली है चेहरा तेरा


मुझे बताने की ज़हमत भी नहीं उठाई जाती
दूर रहा जाता है, कैफ़ियत भी नहीं बताई जाती

तुम डूबे हो खुद में, सीप में कनी की तरह
मैं समंदर में हूँ, इस नमक की कीमत नहीं लगाई जाती

कायनात थी पहले-पहल, दस आयामों में बँटी
जरूर होगी, वरना क्यूँ तेरी तासीर समझ में आई नहीं जाती

हवाओं में खुशबू, फ़िजाओं में मस्ती, हर पेड़ पे फूल खिले हैं
कुदरत जो खेलती होली, हमसे मनाई नहीं जाती

चंद फूल टेसू के इकट्ठा कर, रंग बनाऊँ तुझे लगाऊँ
इतना असली है चेहरा तेरा, नकली गुलाल लगाई नहीं जाती

मेरी गज़ल पूरी होने को आई मगर तुम न आए
जाने क्या रोकता है, आखिरी लाइन लिखी ही नहीं जाती

Friday, December 18, 2009

तुम्हारी याद की कनी



ख़ामोश रहता हूँ कुछ नहीं कहता हूँ
तुम्हारी बदगुमानियाँ चुपचाप सहता हूँ।


तुम्हारा इतराना, इठलाना, बलखाना
पत्थर नहीं हूँ, गोया पत्थर बन रहता हूँ।


गली के मोड़ से आती हो तुम
तुम्हारी पायल की आवाज बूझ जाता हूँ।


मसूड़े दिख रहे होंगे हँसते हुए तुम्हारे
तुम हँसती हो तो दूर से समझ जाता हूँ।


अब बन जाएगा सीप में मोती कोई
तुम्हारी याद की कनी दिल में गहता हूँ।

यकायक अपने ज़द में ले लेता है कोई
बेसाख़्ता उठाता हूँ कलम, गज़ल कहता हूँ।

Thursday, December 17, 2009

इस दुनिया के लोग




प्रेम करो तो चौंकते हैं इस दुनिया के लोग
कतरा के निकलो तो रोकते हैं इस दुनिया के लोग


मैं कितनी उम्मीद से आया था इस शहर में
हर कदम पे नाउम्मीद करते जाते हैं, इस दुनिया के लोग

मेरी पेशानी पे हैं अब भी चिंता की लकीरें
गले में फूलों को हार पहनाते हैं, इस दुनिया के लोग

मैं अपनी ही दुनिया में गुम रहना चाहता हूँ
मुझे खींच के इस दुनिया में ले आते हैं, इस दुनिया के लोग


हँस लो मेरे हालात-ए-जुनूँ पे तुम भले आज
कल मेरी बहकी बातों को फ़लसफ़ा बताएँगे इस दुनिया के लोग

मैं अपनी धुन का पक्का हूँ जिस तरह
मेरी कब्र भी वैसी पक्की बनवाएँगें, इस दुनिया के लोग

Wednesday, December 16, 2009

समंदर




सुबह सहलाता है
दोपहर नहलाता है
रुमानी हो जाता है शाम को
रात को दहलाता है
है तो एक ही,
मगर आठ पहर में
सोलहों श्रंगार दिखलाता है

Tuesday, December 15, 2009

गोवा




उन्मुक्त,आधे चाँद की रात है
सुरीला सागर तट है
नारियल-वन की सौगात है
सागर सुनती तुम हो
हाथ में कापी-कलम
लहरों की दवात है
मैं नशे में हूँ यूँ ही
काजू-फेनी की क्या औकात है

Monday, December 14, 2009

' म '




देश को
पुर्तगाल-संस्कृति की
देन-विरासत(म)

पंजिम
वास्को-डि-गाम
लुटालिम
पलेम
कानकोनम
पलोलेम
और
.................

हम.......

Sunday, December 13, 2009

नफ़ासतपसंद




कभी झींगा
कभी स्टारफिश
कभी केंकड़ा
कभी शंख-सीपी
कभी संरचना अनाम
फेंक-फेंक-सा देता है
समुद्र
कूड़े-सा किनारे पर
.......................
कचरा कभी अपने साथ
नहीं ले जाता
समुद्र

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।