Friday, February 26, 2010

अपने-अपने भाग्य की बात

तुम पूजो यदि पत्थर
वो देवता बन जाए
मैं यदि देव को
तो वो पत्थर हो जाए

अपने-अपने भाग्य की बात
तुम्हारी कश्ती तो मझधारों
से भी बचकर आ जाए
मेरी कश्ती लेकिन हरदम
किनारों से ही धोखा खाए

अपने-अपने भाग्य की बात
तुम चलो यदि राह कँटीली
वह राह सरल हो जाए
मैं चलूँ राह कोई भी
वह काँटों से भर जाए

अपने-अपने भाग्य की बात
सूख रहा हो कंठ तुम्हारा
साक़ी तुम तक चल कर आए
यह तृषित नीरव हरदम
हलाहल ही पाए
अपने-अपने भाग्य की बात

Sunday, February 21, 2010

फिर से वही वीराने

फिर से वही तनहाईयाँ
फिर से वही वीराने
तू कल चला जाएगा
हम हो रहेंगे दीवाने

नजरों पर पहरे होंगे
जुबां पर होंगे ताले
तू तो समझेगा कि
हम हो गए बेगाने

तू कल चाहे हमको भूले
हम न भूल सकेंगे
जिंदगी के साज़ पर छेड़े
तूने जो मस्ती भरे तराने

काश कि तू जान सके
मजबूर हम थे कितने
तेरी याद में काटे हैं
रो-रो कई जमाने

पत्थरदिल

अपने अंतर के खुशी और ग़म
घोल स्मृति प्याले में
मैंने कितने नग़मे गाए
तेरे मुँह से वाह न आई

तेरी खातिर इस दुनिया में
दिल पर कितने ज़ख़्म थे खाए
तुझको सब ये ज़ख़्म दिखाए
तेरे मुँह से आह न आई

तेरे प्यार की खातिर नीरव
जग में हम बदनाम हुए
दास्तां ए बरबादी सुनकर
तुझको मुझ पर चाह न आई

तेरी कोमल राहों पर भी
मैंने सदा बिछाया दिल
मैं चला राह पथरीली
तुझको मेरी परवाह न आई

हम तो फिर भी है दिलवाले
शिकवा करने न आएँगें
तू चल कर आएगी इक दिन
न काटा जाएगा दौर ए तन्हाई

मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।