Friday, March 18, 2011

अनोखी है विषयों की कायनात

बड़ी अनोखी है विषयों की कायनात
इस ब्रह्मांड में सब
एक के, एक सबके
चक्कर लगाते हैं
राजनीति घूमती है अर्थ के गिर्द
अर्थशास्त्र राजनीति के
दोनों समाजशास्त्र के
और समाजशास्त्र दोनों के
ये सब इतिहास के
इतिहास, भूगोल के
भूगोल, भौतिकी के
भौतिकी घुमाती है
रसायन और जीव विज्ञान को
दोनों गणित के
और गणित
गणित संगीत के
संगीत
नृत्य के
नृत्य साहित्य को घुमाता है अपने चारों ओर
साहित्य सौंदर्यशास्त्र और मनोविज्ञान के
और ये दोनों(!)
दर्शन घुमाता है, इन्हें अपने चारों ओर
अरे यह भँवरों का भँवर
मैं फँस गया हूँ इसमें
बड़ी निराली
दुनिया है विषयों की
यहाँ सब घूमते हैं
एक-दूसरे के गिर्द
जैसे ढेर सारे घूमते लट्टू
परिक्रमा करते, करवाते हैं
दूसरे लट्टूओं की
एक-दूसरे से

Thursday, March 17, 2011

ब्यास

हर पर्वतीय नदी
उतर आती है
पर्वतीय स्त्री-पार्वती-में
निरंतरता
निस्संगता
और निर्झरता में
...........................
पहाड़ी पुरुष मगर
नदी में पड़े
विशाल शिलाखंड-सा होता है
कुनमुनाता भी है तो
बड़े जतन में

Wednesday, March 16, 2011

कुल्लू

ढिल्लू
ढूल्लू-मूल्लू
सौंदर्य की दृष्टि से निठल्लू
ब्यास का किनारा न हो
तो एकदम
हुड़कचुल्लू
कुल्लू

Tuesday, March 15, 2011

वशिष्ठ

प्रतिभाशाली सुकुमार राम को
तुमने यहीं
मनाली में
अपने बर्फीले फौलाद में ढाला होगा
तभी तो उन्होंने
राक्षसों के सर्वनाश का
व्रत ले डाला होगा

Monday, March 14, 2011

हिडिंबा

तुम तो राक्षसी थीं
अब तक
हमारे लिए
मायावी राक्षसी
जिसने रचाया था
महाबली भीम से विवाह
और घटोत्कच जन्मा था
शूरवीर पुत्र तुम्हारा
(मगर तुम राक्षसी ही रहीं थीं हमारे लिए)
मनाली में मगर
तुम पूजी जाती हो
देवी हिडिंबा के रूप में भव्य मंदिर है तुम्हारा
.................
सच है भूगोल बदलने से भी
कभी-कभी बदल जाता है इतिहास का नज़ारा
तभी तो मनाली को
अपने सबसे श्वेत बर्फीले खूबसूरत रूप में हमने यहीं निहारा

मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।