Thursday, June 13, 2013

कार ड्राइव करते हुए....!

मुझे इन दिनों
ड्राइव करते हुए
जिंदगी नज़र आती है
फूल-पत्तियों से ढंकी-अटी होकर भी
घर में खड़ी हो तो सुकून पाती है
स्टार्ट करते ही गंतव्य तक पहुँचने की
हड़बड़ी हो जाती है
कोई एफएम आनंद देता नहीं
विविध-भारती भी कभी-कभी ही भाती है
अपने पेन-ड्राइव की धुनें, गज़लें भी
जैसे सुनी-सुनाई मालूम होती है
भीड़-भरी सड़कों पर से
गियर बदलते, टकराते, बलखाते-झुंझलाते
जब लंबी, शांत हरियाली सड़क आती है
तो कार भी जैसे फूलों भरी हो जाती है
टॉप गियर में लगते ही
ज़िंदगी भी हवा-सी हो जाती है
अपनी तीव्रगति के बावजूद
लक्ष्य तक जल्दी पहुँचने की प्रत्याशा में
गाती-गुनगुनाती-मुस्कुराती है
सारी लाइट्स भी ग्रीन पाती है
और थोड़ा रूकना पड़ जाए तो भी
स्टियरिंग पर अँगुलियों की थाप पाती है
लेकिन, जब-कभी लग जाता है जाम
तो झुँझलाहट आ जाती है
खोज़ती है नए रास्ते
भले थोड़े लंबे हों
गतिमान रहना चाहती है
किंतु अनुभूत सच यह है कि
रिवर्स लगाते हुए-कार हो या जिंदगी
कभी सहज नहीं रह पाती है

मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।