Thursday, September 12, 2013

जब तक जियो नहीं मारती है जिंदगी


सब भर जाता है तो सब मर जाता है
खाली कर दो खुद को, तो वक्त लौट आता है

हार कर बैठना भी ईलाज है एक किस्म का
हर वक्त जीतने से, इसका मायना मर जाता है

जब तक जियो नहीं मारती है जिंदगी
जिंदादिली से मरना भी, अमर कर जाता है

हम अपने ही प्रेत के होते हैं ग़ुलाम
गुज़रा हुआ तो भूत है, कहाँ लौट पाता है

वक्त जिया तो ठीक, गुज़ारा-गँवाया तो ठीक
हम जो मानें, बही-खाते में वही नजर आता है

मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।